डॉक्टर सुस्मित कुमार, पीएचडी

Trickle Down Economic Policy would not work for India Part II - click here for its English version

अमेरिका में शिक्षित अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टपकने वाली अर्थव्यवस्था सबसे अच्छा है - यानी टैक्स में कटौती होने से, मुख्य रूप से समृद्ध लोग नई कंपनियों और प्रौद्योगिकियों बनाने में निवेश करेगी जिसे से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। लेकिन यह पूरी तरह से फर्जी सिद्धांत है। हम तीन मामलों में निम्नलिखित पर विचार करते हैं - अगर आप निचे लिखे तीन तरह के लोंगो को एक करोड़ रुपया दे:

 (1) एक अमीर (एक करोड़) - वह एक फेरारी कार (एक कीमती गाड़ी) खरीद लेगा.

(2) १० मध्यम वर्ग के व्यक्ति (प्रत्येक को १० लाख) - वे १० मकान या १० कारें खरीद सकते हैं।

(3) १०० गरीब लोगों (प्रत्येक को १,००,००० रुपया) - वे भोजन पर खर्च करते हैं, बच्चों, ऑटो, अन्य खर्चे जेसे की भोजन (खुदरा स्टोर आदि), कपड़े, स्कूल / कॉलेज, डॉक्टर / दवाओं, आदि पर खर्च.

अब आप पता कर सकते हैं कि कितनी नई नौकरियों इन 3 परिस्थितियों में होगी। सरकार को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए जनसंख्या के नीचे पचास प्रति सत लोगों के उत्थान के लिए की जरूरत है। भारत में करीब एक करोड़ लोग (जनसंख्या का कम से कम १%) आयकर का भुगतान करते हैं. इसलिए आयकर कटौती करके उपभोक्ता चालित आर्थिक सिद्धांत कभी नहीं सफल होगा। मोदी प्रशासन को आयकर छूट की सीमा, जो अभी २.५ लाख है, वृद्धि नहीं करनी चाहिए। सरकार को सीधे कम आय वर्ग के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत है। यह आबादी है जिनको महत्वपूर्ण आर्थिक विकास नहीं मिला है. सरकार को इनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए एकत्रित आयकर को अच्छी तरह उपयोग करने की जरूरत है।

१९३० के दशक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति एफडी रूजवेल्ट की सरकार ने १९३० के दशक के भयानक आर्थिक मंदी (ग्रेट डिप्रेशन) से बाहर आने के लिए प्रोत्साहन पैकेज दो बार बजट १९३३ और १९३५) मैं दिया था, लेकिन तब भी बेरोजगारी द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में दोहरे अंक में था। अमेरिका में १९३० के दशक के भयानक आर्थिक मंदी से बाहर आया जब की वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर हथियार बनाने की शुरवात की, यानी की बड़े पैमाने पर सरकारी व्यय के कारण ही अमेरिका १९३० के दशक के भयानक आर्थिक मंदी से उभर सका. अन्यथा अमेरिका को भयानक आर्थिक मंदी से उभर ने में कई दशक और लगते.

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